School Principal Message

निरंतर परिवर्तन प्रकृति का नियम है। चिरस्थाई कुछ नहीं। जो इस परिवर्तन के प्रवाह के साथ खुद को बदलने का साहस रखते हैं वही सफलता के शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
शिक्षा एक ऐसा प्रतिबिंब है जो सर्वप्रथम परिवर्तन को उजागर करता है। नित नए नवोन्मेष का संचार शिक्षा की ही देन है । बी. ऍफ़. स्किन्नर के शब्दों में
“जो आपने सीखा है उसे भूल जाने के बाद जो रह जाता है वो शिक्षा है.” जो आप प्रारम्भ मे ग्रहण करते हैं उसको असल जीवन मे उपयोग में लाना ही सच्ची शिक्षा है । फिर चाहे वह ज्ञान हो या मूल्य या विचार।
अगर विचारों की बात करें तो स्वामी विवेकानंद ने कहा “जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे. यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे, अगर खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे.” हमारे विचार ही हमारे व्यक्तित्व का आधार हैं। अतः मेरी सब छात्रों से यह अपेक्षा है की वह अपने विचारों को इतना अनमोल बनाएँ की कर्म और जीवन स्वयं ही प्रकाशित रहें।

महात्मा गाँधी के शब्दों मे “ हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें. हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा.”